महाभारत में भगवान श्री कृष्ण को देख आप भी सीख सकते हैं गुस्से पर कैसे करें काबू

यह बात कई सदियों से हमारे बड़े बुजुर्ग सभी कहते आए हैं की बार बार क्रोध करने से सबसे पहले आप अपने घनिष्ठ और सगे संबंधियों को खो देते हैँ, महाभारत का युद्ध सिर्फ क्रोध और अहंकार का ही परिणाम था चाहे वह क्रोध किसी भी पक्ष से रहा हो। कहा जाता है की बुद्धि भ्रष्ट अथवा नष्ट होने का कारण भी क्रोध है, वह दुर्योधन का क्रोध ही था जो वह अपने शुभचिंतको, गुरुजनों और माता-पिता के समझाने पर भी युद्ध पर अडिग रहा और अंत में अपने कुल के विनाश का कारक बना। ऐसा सिर्फ एक ही उधारहण नहीं है बल्कि अन्य और भी कई हैं जहां क्रोध ना सिर्फ उस व्यक्ति का बल्कि उसके समस्त कुल का नाश कर दिया है।

परिस्थिति को हमेशा गंभीरता से देखना चाहिए

महाभारत में यह उल्लेखित है की जब भरी सभा में शिशुपाल श्रीकृष्ण को अपमानित करता रहा मगर उस वक़्त उन्होंने अपना संयम नहीं खोया मगर जब उन्हे लगा की अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है तो उन्होने सही समय की प्रतीक्षा की उसके बाद ही उन्होंने शिशुपाल का वध कर दिया। इसीलिए कहा गया है की कोई भी निर्णय क्रोध में नहीं लेना चाहिए, हमेशा सोच विचार कर ही कोई भी कदम उठाना चाहिए।

क्रोध को नियंत्रित कैसे करें

  • आपको बता दें हमे हमेशा चाहिए की अपने चेहरे पर एक मुस्कुराहट बनाए रखें और कोई भी प्रतिक्रिया आवेश या जल्दबाजी में ना दें।
  • इसके अलावा आपको यह भी बताते चलें की अपने क्रोध को नियंत्रण में रखने के लिए हमे हमेशा अपनी दिनचर्या में मेडिटेशन और व्ययाम को स्थान दें।
  • इसके अलावा आपको यह भी बताते चलें की क्रोध को नियंत्रण करने के लिए किसी भी स्थिति में आप अपना संयम ना खोएं क्योंकि किसी भी स्थिति से उत्तेजित होकर नहीं पार पाया जा सकता।

आपको बताते चलें की विश्व के सबसे बड़े युद्ध यानी की महाभारत जैसे भयंकर युद्ध को जीतना एक तरह से पांडवो के लिए बिलकुल भी आसान नहीं था पर उन्होंने संयमित होकर अपने सभी निर्णय लिये और श्री कृष्ण द्वारा बनाई नीतियों पर चलकर बड़े बड़े महारथियों से लड़ पाए और अंत में विजय हासिल की। यह श्री कृष्ण की ही सीख है कि जिसने क्रोध को नियंत्रित कर लिया वह बड़े से बड़ा युद्ध जीत सकता है और परिस्थितियों को अपने वश में कर सकता है। महाभारत की विजय या पराजय क्रोध न होने और संयम होने का ही परिणाम था। हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए की क्रोध मनुष्य को नहीं, मनुष्य क्रोध को अपने वश में करे तभी वो कहीं भी किसी भी परिस्थिति में सफलता प्राप्त कर सकता है।