होलिका दहन के समय राशि अनुसार करें ये उपाय, पूरे साल नहीं होगी धन-संपदा की कमी

होलिका दहन की लपटें बहुत शुभकारी होती हैं. होलिका दहन की अग्नि में हर चिंता खाक हो जाती है, दुखों का नाश हो जाता है और इच्छाओं के पूर्ण होने का वरदान मिलता है. बुराई पर अच्छाई की जीत के इस पर्व में जितना महत्व रंगों का है, उतना ही होलिका दहन का भी है. ये मान्यता है कि विधि विधान से होलिका पूजा और दहन करने से मुश्किलों को खत्म होते देर नहीं लगती|

ज्योतिषियों का कहना है कि होली पर अगर आप विधि विधान से परिक्रमा कर सही प्रसाद चढ़ा दें तो खाली झोली भरते देर नहीं लगेगी. क्‍योंकि इस बार होलिका दहन पर बेहद शुभ संयोग बन रहा  है और राशि अनुसार  कुछ खास चीजें अगर होली की अग्नि में अर्पित की जाएं तो इससे व्यक्ति के जीवन में खुशियों का संचार होता है, होलिका दहन के समय राशिअनुसार क्या उपाय करने चाहिए, आइए आपको बताते हैं इनके बारे में ……………

मेष राशि :-

मेष राशि के जातक होलिका दहन के समय अग्नि में नारियल चढ़ाएं।

वृष राशि :-

वृ​ष राशि के जातक 11 गोमती चक्र कपड़े में बांधकर इसे होली की अग्नि में अर्पित करें, इससे आपके व्यवसाय में वृद्धि होगी।

मि​थुन राशि :-

मिथुन राशि के जातक आटे के पांच गोले बनाकर होली की अग्नि में चढ़ाएं, इससे आपके घर में धन – धान्य की कमी नहीं होगी।

​कर्क राशि :-

कर्क रा​शि के जातक होली की ​अग्नि में मखाने और सूखे छुहारे चढ़ाएं।

सिंह राशि :-

सिंह राशि के जातक बताशे और लौंग का जोड़ा होली की अग्नि में अर्पित करें।

कन्या राशि :-

कन्या राशि के जातक पांच गोबर के कंडे होली की अग्नि में चढ़ाएं।

तुला राशि :-

तुला राशि के जातक होली की ​अग्नि में एक मुट्ठी सूखे मेवे चढ़ाएं।

वृश्चिक राशि :-

वृश्चिक राशि के जातक सूखा गोला होली की अग्नि में चढ़ाएं, परिवार में सुख और शांति बनी रहेगी।

धनु राशि :-

धनु राशि के जातक होली की ​अग्नि में तिल चढ़ाएं।

मकर राशि :-

मकर राशि के जातक होली की ​अग्नि में खीर चढ़ाएं, इससे धन – संपदा की प्राप्ति होगी।

कुंभ राशि :-

कुंभ राशि के जातक होलिका की परिक्रमा कर उसमें आठ पूरियां चढ़ाएं।

मीन राशि :-

मीन राशि के जातक होली की अग्नि में मिष्ठान चढ़ाएं, जीवन में खुशियों का संचार होगा।

होलिका दहन की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार दानवराज हिरण्यकश्यप ने जब देखा की उसका पुत्र प्रह्लाद सिवाय विष्णु भगवान के किसी अन्य को नहीं भजता, तो वह क्रुद्ध हो उठा और अंततः उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाएं; क्योंकि होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि नुक़सान नहीं पहुँचा सकती. किन्तु हुआ इसके ठीक विपरीत, होलिका जलकर भस्म हो गयी और भक्त प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ. इसी घटना की याद में इस दिन होलिका दहन करने का विधान है. होली का पर्व संदेश देता है कि इसी प्रकार ईश्वर अपने अनन्य भक्तों की रक्षा के लिए सदा उपस्थित रहते हैं.

क्या है परिक्रमा का महत्व?

होलिका पूजा और दहन में परिक्रमा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. कहते हैं परिक्रमा करते हुए अगर अपनी इच्छा कह दी जाए तो वो सच हो जाती है.

परिक्रमा के अलावा होलिका दहन में उपलों को जलाना भी होता है बेहद जरूरी. कितने उपले जलाएं, किस आकार के उपले जलाएं ये भी आपको अपनी मनोकामना और श्रद्धा के हिसाब से तय करना होगा.

परिक्रमा और उपले तो आपके सपनों को परवान चढ़ाएंगे ही, प्रसाद की अहमियत भी कुछ कम नहीं. चाहे आपको सुख समृद्धि की दरकार हो या फिर विदेश यात्रा करनी हो, सवाल नई नौकरी का हो या फिर संतान प्राप्ति का आशीर्वाद चाहिए, होलिका पूजन से आपकी सभी इच्छाएं भी पूरी हो सकती हैं.