नहीं रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर, कैंसर की जंग हार 63 साल की उम्र में कह गये दुनिया को अलविदा

काफी समय से बीमार चल रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर अब हमारे बीच नहीं रहे  आज  शाम 6.15 बजे गोवा में  उन्होंने अपनी अंतिम सांसे ली । वह 63 साल के थे और कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। उनके इस दुनिया में न रहने  पर  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया ट्वीट किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। आज शाम मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर जानकारी देते हुए कहा था की सीएम पार्रिकर की हालत बेहद नाजुक थी।  उन्होंने पणजी के समीप स्थित अपने निजी आवास पर अंतिम सांस ली। उनके इस दुनिया में न रहने  के बाद पूरे देश में शोक की लहर है।

आपको बता दें कि 63 वर्षीय पर्रिकर को सोमवार सुबह 11 बजे श्रधांजलि दी जाएगी। आपको बता दें कि भारत की राजनीति में कुछ गिने-चुने ऐसे राजनेता मौजूद हैं जिनकी छवि एक दम साफ है और इन्हीं साफ छवि वाले नेताओं में से एक नेता मनोहर पर्रिकर था जिन्हें उनके द्वारा किए गए कार्य और उनकी ईमानदारी के लिए जाना जाएगा। वहीँ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मनोहर पर्रिकर के निधन पर कहा कि ”गोवा के सीएम श्री मनोहर पर्रिकर जी के निधन की खबर से मुझे गहरा दुख हुआ है, वो एक साल से अधिक समय तक दुर्बल बीमारी से जूझते रहे। वह गोवा के पसंदीदा बेटों में से एक थे। इस दुख की घड़ी में उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदना।”

आपको बता दें कि परिर्कर को जब कैंसर का पता चला था तो उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की इच्छा जताई थी। लेकिन उसके बाद भी भाजपा ने उन्हें CM बनाये रखा। मनोहर पर्रिकर के ज्यादा तबियत बिगड़ने के बाद भाजपा के कोर कमेटी के नेता दयानंद मंडरेकर ने कहा था कि पर्रिकर की तबीयत खराब हो गई है और पार्टी पर्रिकर के स्थान पर जल्दी ही एक नए नेता की नियुक्ति कर सकती है। उन्होंने कहा, ‘अगर मनोहर पर्रिकर फिट होते, तो नेता को बदलने की जरूरत नहीं होती, लेकिन उनकी सेहत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। पार्टी को कुछ फैसला लेना चाहिए। केंद्र से गोवा तक कुछ निर्णय लिया जाना चाहिए। मुझे लगता है कि यह किया जाएगा।’

गौरतलब है कि मनोहर पार्रिकर ने गोवा मुख्यमंत्री पद की शपथ 14 मार्च 2017 को ली। इससे पहले भी वह 2000 से 2005 तक और 2012 से 2014 तक गोवा के मुख्यमंत्री के साथ ही वे बिजनेस सलाहकार समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। 2014 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देकर भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार में रक्षा मंत्री का पदभार ग्रहण किया। वे पहले ऐसे भारतीय मुख्यमंत्री है, जिन्होंने आई आई टी से स्नातक किया हुआ है।

पर्रिकर अपने स्कूलों के दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हो गए थे। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने आरएसएस की युवा शाखा के लिए भी काम करना शुरू कर दिया था। जिसके बाद उन्हें बीजेपी पार्टी का सदस्य बनने का मौका मिला और उन्होंने बीजेपी पार्टी की तरफ से पहली बार चुनाव भी लड़ा। बीजेपी ने पर्रिकर को साल 1994 में गोवा की पणजी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया। वहीं पर्रिकर को इस चुनाव में जीत मिली, लेकिन बीजेपी इन चुनाव में कुछ खास नहीं कर सकी। वहीं पर्रिकर ने गोवा की विधानसभा सभा में विपक्ष नेता की भूमिका भी निभाई हुई है। आपको बता दे   कुछ महीने पहले पुल के काम को वो देखने गए थे, तब उनकी ली हुई तस्वीर काफी वायरल हुई थी.