20 लाख रुपए की बैंक की नौकरी छोड़ करने लगा खेती, अब कमाता हैं 30 लाख, जाने कैसे?

दोस्तों आज के जमाने में हर कोई बढ़िया नौकरी की तलाश में रहता हैं. सभी यही चाहते हैं की वो अपने गाँव से निकल शहर जाए और ऊँचे दर्जे वाली कोई नौकरी करे. खेती में आजकल की युवा पीढ़ी को बहुत कम दिलचस्पी रह गई हैं. जिनके पास पैत्रिक खेती थी भी तो इन्होने उसे बेच दिया. कई लोगो ने तो ये सोच बनाई ली हैं की खेती करने से उनका स्टेटस कम हो जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हैं. खेती को भी यदि आधुनिक तकनीक से किया जाये तो आप इससे भी अच्छा खासा पैसा कमा सकते हैं. आज की युवा पीढ़ी को अप्नेअधुनिक ज्ञान और इंटरनेट जैसी सुविधा का इस्तेमाल खेती में नए नए प्रयोग में भी करना चाहिए. इससे उन्हें बहुत फायदा हो सकता हैं. आज हम आपको ऐसे ही एक व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने खेती में ऐसा दिमाग लगाया की वो इससे 30 लाख तक की कमाई कर सकता हैं.

दरअसल मह्ध्य प्रदेश के इंदौर शहर के रहने वाले सुरेश शर्मा पहले एक प्राइवेट बैंक में का करते थे. यहाँ उन्हें 20 लाख रुपए साल के मिलते थे. हालाँकि उन्होंने ये नौकरी छोड़ किसान वाली जिन्दगी जीने का मन बना लिया. हुआ ये की एक बार वे घुमने के लिए महाराष्ट्र के महाबालेश्वर घुमने गए. यहाँ के हिल स्टेशन का मशहूर फल स्ट्राबेरी हैं. उन्होंने यहाँ इसके कुछ खेत भी देखे. ऐसे में उन्होंने सोचा की क्यों ना इस स्ट्राबेरी के पौधों को अपने मध्य प्रदेश की जमीन पर लगाया जाए. बता दे की मध्य प्रदेश में गेहूं, चना और सोयाबीन की खेती ज्यादा होती हैं. यहाँ स्ट्राबेरी की खेती ना के बराबर देखने को मिलती हैं. किसी ने यहाँ की जमीन पर इस तरह की खेत्री करना बड़े लेवल पर ट्रॉय नहीं किया था. ऐसे में सुरेश ने ये मन बना लिया की वो तो अपने शहर में ही गेहूं चने की खेती वाली जमीन पर स्ट्राबेरी की खेती कर के दिखाएंगे.

इसके लिए सुरेश महाराष्ट्र से स्ट्राबेरी के 50 पौधे खरीद कर ले आए. इसके बाद उन्होंने इंदौर के संवर बायपास के नजदीक एक जमीन खरीद ली और वहां इन 50 स्ट्राबेरी के पौधों को प्लांट कर दिया. बता दे की सुरेश ने इसके पहले महारष्ट्र में स्ट्राबेरी की खेती करने वाले किसानो से इसकी बारीकियां समझी थी. इसके बाद उन्होंने अपना यही ज्ञान यहाँ आजमाया. उनकी मेहनत रंग लाइ और उन्होंने अपनी दो एकड़ की जमीन पर स्ट्राबेरी की खेती कर डाली. सुरेश बताते हैं की ये खेती पूरी तरह से मौसम पर निर्भर करती हैं. अभी इन पौधों में फूल आने लगे हैं फिर जल्द ही फल भी निकल आएँगे. उन्हें उम्मीद हैं की इन्हें बेच करीब 30 लाख तक की कमी हो जायेगी.

सुरेश ने इस खेती को स्टार्ट करने के पहले काफी रिसर्च की थी, इसके बाद ही इसमें हाथ डाला. अब उनकी रिसर्च काम आ गई और वो अपनी पुरानी बैंक की नौकरी की तुलना में खेती से हर साल दस लाख ज्यादा की कमी कर लेंगे. इसलिए आप खेती को भी छोटा मोटा ना समझे. हमारी युवा पीढ़ी को चाहिए की वो इसे नए नए प्रयोग करे और अपनी तक़दीर खुद लिखे.