जब स्वयं भोलेनाथ योगी का भेष बनाकर कान्हा के दर्शन के लिए धरती पर पधारे

हिन्दू धर्म में कुल तकरीबन 14 करोड़ देवी-देवताओं का उल्लेख किया गया है जिनमे से कुछ देवी देवता काफी ज्यादा महत्वपूर्ण माने गए हैं जिन्हे ना हिर्फ हमारे भारतवर्ष में जाना जाता है बल्कि समूचे विश्व में इनकी पुजा अर्चना की जाती है। इन्ही में से एक हैं भगवान श्री कृष्ण जिनकी लीलाओं से पूरा ब्रम्हान्ड परिचित है और आज हम आपको उनकी एक लीला से परिचित करने जा रहे है जब उनके बाल रूप के दर्शन के लिए स्वयं त्रिलोकनाथ, देवो के देव महादेव धरती पर एक योगी का भेस बनाकर पधारे है।

बता दें की श्री कृष्ण बचपन से ही बड़े चंचल रहे हैं, वैसे तो भगवान कृष्ण खुद ही भोलेनाथ का अवतार हैं मगर धरती पर से अत्याचार का नाश करने के लिए जब कृष्ण ने बाल रूप से एक शुरुवात की थी तो उनके इसी बाल रूप को देखने के लिए खुद शिव शंकर इतने ज्यादा लालायित हो गए थे की खुद को रोक नहीं सके और धरती पर माँ यशोदा के पास चले आए और उनके पुत्र यानी की श्री कृष्ण के दर्शन की इच्छा जताई।

मगर उस वक़्त स्थिति कुछ और ही हो गयी जब मैया यशोदा द्वारा योगी महाराज के लिए लायी गयी भिक्षा को उन्होने लेने से माना करते हुए सिर्फ ये इच्छा जताई की उन्हे सिर्फ उनके पुत्र के दर्शन करने हैं जैसपर ,ऐया यशोदा को शंका हुई क्योंकि इससे पहले भी बाल कृष्ण को देखने और गोद में खिलाने के लिए कई दुष्ट शक्तियाँ आ चुकी है जो कान्हा का अनिष्ट करना चाहती थी। इस बार फिर से कुछ ऐसा ही सोचकर मैया यशोदा ने योगी के रूप में स्वयं शिवशंकर को बाल कृष्ण के दर्शन देने से कड़े स्वर में माना कर दिया क्योंकि वो नहीं चाहती थी की एक बार फिर से उनके पुत्र पर किसी तरह की कोई विपत्ति आए।

भोलेनाथ चाह कर भी ये नही बता सकते थे की वो कौन हैं और इधर दूसरी तरफ माँ यशोदा उन्हे कोई मायावी साधू समझ रही थी और बालक को बाहर नहीं ला रही थी। अभी यही सब चल रहा था की कहीं से एक वृद्ध महिला आ जाती है और यशोदा को समझाती है की वो इस महाशक्ति योगी से परिचित हैं और उन्हे बखूबी जानती हैं। इससे पहले वो इनसे काशी में भी मिल चुकी हैं जहां वो खुद ही रहा करती थी और वो यशोदा को समझती है की वो इन योगी को अपने लल्ला के दर्शन करा दें कान्हा धन्य हो जाएगा।

तब वो वृद्ध महिला उन्हे समझती है की ये योगी कौन हैं और और कितने महान है और जो भी इनके दर्शन करता है उसके सभी तरह के भाय आदि खत्म हो जाते हैं। तब जा कर यशोदा को उनपर यकीन होता है और वो बाल रूप कान्हा को लेकर योगी महाराज के रूप में साक्षात भगवान शिव शंकर के दर्शन को लेकर आती हैं। निश्चित रूप से वह दृश्य वर्णन नहीं किया जा सकता है क्योंकि उस वक़्त बाल कृष्ण के रूप को देखकर महादेव इतने ज्यादा भावविभोर हो गए थे और उनके अंदर से इस तरह के भाव निकल कर आ रहे थे जो अवर्णनीय था। खैर मैया यशोदा के दर्शन पा कर योगी के रूप में आए भोलेनाथ बेहद ही प्रसन्न हुए और लाल का मुख देख कर ही बिना भिक्षा लिए ही प्रसन्न मुद्रा में लौट गए।