जिसने ना हिम्मत हारी ना ही समाज की मानी, जिसका एक ही संकल्प था IAS, कुछ ऐसी हैं सीमा त्रिपाठी

हमेशा से ही न जाने क्यों हमारे समाज मे लड़कियों के प्रति ऐसी संवेदना नही रही है जैसा लड़को को लेकर रहती है। जहां हमारे समाज मे लड़को को अपने जीवन मे कुछ कर दिखाने के लिए उन्हें अपने जीवन के सारे निर्णय लेने की छुट दी जाती है लेकिन वहीं दूसरी ओर हमेशा से ही लड़कियों को घर बसाने की मानसिकता बनाई जाती है। उन्हें हमेशा ही यह कहा जाता है। पढ़ लिख कर कुछ नही होगा, बाद में खाना ही बनाना है। ऐसे में आज हम आपको एक सच्ची घटना से रूबरू कराने जा रहे है, जो आज सभी के लिए एक बड़ा उदाहरण है कि लड़कियां क्या कर सकती हैं। यह घटना एक नारी की शक्ति व उसके दृण संकल्प को दर्शाता है।

यह बात इलाहाबाद की रहने वाली सीमा त्रिपाठी की है जो एक मिडिल क्लास परिवार से बिलांग करती हैं। बता दें की स्वभाव से काफी सरल और सुलझी हुई सीमा आईएएस बनने का ख्वाब देखती है और उसे स्वीकार करने की चाह में दिन रात तैयारी भी करती है। लेकिन समाज ने एक बार फिर हर बार की तरह उनके भी पांव में बेड़िया लगाने की कोशिश की। उन्हें ये कहा जाता था कि तैयारी कर क्या करोगी, शादी करो और घर बसाओ। लेकिन सिमा लोगों की बातों से विचलित नही हुई बल्कि उन्होंने अपने संकल्प और इच्छाशक्ति को बनाए रखा और मजबूती से उस परिस्थिति का जमकर के सामना क़िया। धीरे धीरे वह अपने सपनो को साकार करने के लिए एक एक कदम बढ़ाती गई। ऐसे में उन्हें काफी असफ़लताओ का भी सामना किया लेकिन कड़ी मेहनत व अपने दृण संकल्प से आखिरकार वह अपने सपनो को साकार कर पाई यानी वह सफल हुई और सभी के लिए प्रेरणा का एक बड़ा उदाहरण बनी।

आईएएस बनने के बाद भी उनकी चुनौतियां कम नही हुई। ऑफिस और घर दोनो संभलना बड़ी चुनौती की बात है लेकिन वह बखूबी दोनो को ही मैनेज कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा अक्सर मुझसे पूछा जाता है कि काम और परिवार दोनो को आप कैसे बैलेंस कर लेती हैं? उनका कहना है कि मुझे पुरुषों और महिलाओं के काम में मामूली अंतर ही देखने को मिलता हैस क्योंकि पुरुष भी अपने काम और घर दोनो को ही साथ लेकर के रिश्ते को अच्छी तरह निभाते हैं। जैसे – डेली रूटीन, स्वास्थ्य और अन्य चीजों की देखभाल करना वो भी बखूबी समझते हैं। फर्क बस इतना है कि महिलाओं की प्रतिबद्धता हर मिनट की होती है और पुरुषों की इसकी तुलना में कम होती है।

इसके साथ ही उन्होने अपनी बेटी के बारे में बताते हुए कहा कि मेरी बेटी अभी छोटी है, जिसके चलते मुझे उसे काफि संभालना होता है, यह थोड़ा मुश्किल है लेकिन मैं मैनेज कर लेती हूं। उन्होंने यह भी कहा कि मैं जहां भी हूं उसका क्रेडिट मेरी मां को जाता है। यह एक बड़ा उदाहरण है, लड़कियों को लेकर। लेकिन अभी भी बदलता माहौल उनके अनुकूल नहीं है। जरूरी है लड़के और लड़कियों के बीच भेद भाव करना बंद करे।