सॉफ्टवेयर इंजीनियर लड़का पहुँचा था एंगेजमेंट करने मगर हालात बने ऐसे की सात फेरे लेकर दुल्हन को ले आया घर, हर कोई फैसले से था हैरान

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि शादियों का महीना चल रहा है। ऐसे में आपको हर जगह शादियां होती हुई दिख रही होंगी। देखा जाए तो बीता हुआ फरवरी के महीना शादियों की दृष्टि से काफी शुभ साबित हुआ है क्योकि इस वर्ष के फरवरी माह में जिनकी शादी कई वर्षों से नहीं हो रही थी। इस वर्ष के फरवरी माह में इनकी शादी हुई और अभी भी इस वर्ष के मार्च महीने में शादियों का होना लगा हुआ है। ऐसे में देखा जाए तो शादीयों में काफी रश्में होती हैं और हर रश्मों के लिए काफी पैसे फिजूल खर्च किए जाते हैं। देखा जाए तो यह रस्में हमारे भारतीय कल्चर को दर्शाती हुई दिखाई देती है और यह हमारी पुरानी परंपराओं को भी जागृत करती हैं।

देखा जाए तो इन रश्मो से शादी तक कुछ लोग इतने खर्चे कर देते हैं कि यह सभी को हैरान कर देती है। देखा जाए तो यह शादी एक तरह से कम लोगो का दिखावा ज्यादा लगने लगता है। वह ऐसा करके अपना समाज मे और नाम बनाना चाहते है। इन दिखावटी शादियो में खर्चे भी हद से ज्यादा हो जाती है या यूं कह लीजिए कि पैसे इन शादियो में पानी की तरह बहा दिए जाते है। ऐसे में आज हम आपको एक ऐसी अनोखी शादी के बारे में बताने जा रहे है, जिस शादी में दिखावा बिल्कुल भी नही किया गया और ना ही किसी भी प्रकार के फिजूल खर्च किये गए।

जी हां, आपको बता दे कि वैसे तो हमारे सामाज में कई प्रथाए है, जिनका हम सभी अनुसरण करते है। लेकिन कुछ प्रथाएं ऐसी भी है, जिनका समय के हिसाब से बदलाव करना आवश्यक हो चला है।

यह बदलाव भी कोई और नही हम सभी के प्रयासों से की जाती है। ऐसे में एक बदलाव की पहल बाफना फैमली की ओर से की गई है। आपको बता दे कि कांकेर से बाफना फैमली के बेटे गुरुवार को कवर्धा लड़की से सगाई के लिए पहुंची थी। लड़के का नाम यश है, जो अभय बाफना के बेटे है। आपको यह भी बता दे कि यश एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। ऐसे में बाफना फैमली यश का रिश्ता लेकर कवर्धा में रहने वाले दिलीप नाहटा के घर पहुँचे। जहां बाफना फैमली दिलीप नाहटा की बेटी दिव्या से अपने बेटे की सगाई कराने के लिए पहुचे थे।

आपको बता दे कि 28 फरवरी को ही दोनों की सगाई होनी थी। इसी कारणवश बाफना फैमिली अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ कवर्धा पहुंचे थे। सगाई की तैयारी की बड़ी तेजी से की ही जा रही थी कि तभी दिलीप के होने वाले समधी यानी अभय बाफना के कहे पर फिजूलखर्ची न किये जाने पर विचार किया और समाज मे इसे रोकने की प्रेरणा देते हुए सगाई के मौके पर ही दोनों की शादी करा डाली। जी हां, देखते ही देखते मंडप सजाया गया और दूल्हा और दुल्हन ने फटा फट सात फेरे लिए और बाफना फैमली बहु लेकर घर पहुंच गई।

यह भी पढ़ें :