हेलिकॉप्टर क्रैश में शहीद हुए पति की पार्थिव शरीर लेने वर्दी में पहुंचीं स्क्वाड्रन लीडर पत्नी के रुक नहीं पा रहे थे आंसू, बार बार कहती रही…

पिछले कुछ दिनों से देश में काफी ज्यादा ज्यादा तनाव का माहौल बना हुआ था मगर जकब कल से भारत की तरफ से लगातार बढ़ते दबाव की वजह से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को भारत के पायलट अभिनंदन को भारत को सौंपना पड़ा। एक तरह से देखा जाए तो यह हमारे देश क्व लिए बहुत ही महत्वपूर्ण जीत है पाकिस्तान के खिलाफ मगर वहीं दूसरी तरफ एक और खबर है जिसमे जम्मू कश्मीर के बड़गाम में बुधवार को हेलिकाॅप्टर क्रैश हो जाने से चंडीगढ़ के स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ शाहिद हो गए थे और आपको बता दें कि उनकी शहादत को याद करने के लिए पूरा शहर गुरुवार को आंसुओं में डूब गया।

आपकी जानकारी के लिए बता दें की शहीद सिद्धार्थ को एयरफोर्स अफसरों की टीम की मौजूदगी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर को शाम 7:50 बजे सेक्टर-44 स्थित उनके घर पर लाया गया। बताते चलें की आज शुक्रवार को सुबह सुबह 10:30 बजे सेक्टर-25 स्थित क्रिमेशन ग्राउंड में शहीद सिद्धार्थ का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ कर दिया गया। जैसा की हमेशा और हर बार शहीद को सम्मान देते हुए उसे गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है उसी तरह से सिद्धार्थ को भी इंडियन एयरफोर्स की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

इस दौरान शहीद की शहादत में शामिल होने और उनके सम्मान में इलाके के सभी लोग अपने अपने घरों से बाहर निकल आए थे, बता दें की  गुरुवार की शाम 5.30 बजे जब एयरफोर्स स्टेशन से एक गाड़ी आई और उसमे से एक एयरफोर्स लेडी ऑफिसर और कुछ जेंट्स ऑफिसर उतरे। उन्होंने अपने हाथ में फौज की एक वर्दी भी ली हुई थी तभी सामने से देख्ने को मिलता है की कुछ ही देर बाद स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ की पार्थिव देह को एयरपोर्ट से उनकी पत्नी आरती बाकायदा एयरफोर्स की ड्रेस में लेकर आई। बताते चलें की 12 विंग एयरफोर्स स्टेशन के अफसरों की टीम ने सिद्धार्थ के पार्थिव शरीर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ एयरपोर्ट से सेक्टर 44 तक लेकर आया। पार्थिव शरीर के आते ही वहाँ मौजूद सभी लोगों ने जय हिन्द और भारत माता की जय के नारे भी लगाए।

बताते चलें की स्क्वाड्रन लीडर आरती जब अपने शहीद पति के पार्थिव शरीर को लेने एयरपोर्ट पर पहुंची तो उस दौरान वो खुद भी एयरफोर्स की ड्रेस थीं। जिस हिम्मत और साहस के साथ वो अपने पति का पार्थिव शरीर लेकर आईं वो निश्चित रूप से बेहद ही साहसी पूर्ण था। मगर जैसे ही वो अपने घर में दाखिल हुई फूट-फूट कर रोने लगीं और  उस वक़्त उनके मुह से सिर्फ एक ही बात निकाल रही थी कि सिद्धार्थ मेरा साथ क्यों छोड़ गए। शहीद पिता को उनके 2 साल के बेते ने मुखाग्नि दी।

 

आपकी जानकरी के लिए बताते चलें की सिद्धार्थ के चाचा सतीश चंद के अनुसार सिद्धार्थ भारतीय सीमा घुसे जहाजों को ट्रेस करने गया था मगर उसी दौरान किसी वजह से उनका एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया जिसमे वो शहीद हो गए।

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