इन 5 लोगो से श्रापित होने पर कभी नहीं प्राप्त होता संतान सुख , जानें श्रापमुक्त होने के क्या है उपाय

ये बात तो हम सभी जानते है के हम सभी के इर्द-गिर्द कुछ शक्तियाँ हर वक्त साथ रहती हैं| पॉजिटिव और नेगटिव ये दो तरह की एनर्जी हम सभी के साथ रहती है और अगर ऐसे में हमारे साथ या हमारे द्वारा कुछ सही किया जाता है तो यह पॉजिटिव एनर्जी का काम होता है| वहीँ अगर हमारे द्वारा अगर कुछ गलत किया जाता है तो उसके लिए नेगेटिव एनर्जी ज़िम्मेदार होती है| हमारे हिन्दू धर्म में आशीर्वादों और श्रापों को काफी हद तक महत्व दिया जाता है और ये काफी पुराने वक्त से चले आ रहे हैं|

मान्यताओं के अनुसार अगर आप किसी का आशीर्वाद पाते हैं तो आशीर्वाद के रूप में वह आपको पॉजिटिव एनर्जी देता है वहीं अगर आप श्राप को ग्रहण करते है तो यह आपके अंदर नेगटिव एनर्जी का संचार करता है| इसीलिए अक्सर हम आशीर्वाद उन्ही से प्राप्त करते हैं जो हमारे ऊपर खुश रहते हैं वहीँ दूसरी और श्राप उसी वक्त मन से निकलता है जब मन अंदर से किसी पर दुखी या द्रवित हो |

मातृश्राप

वैसे तो माता को दया और ममता की मूर्त माना जाता है और माँ से श्राप मिलना काफी अटपटा सा लगता है| परन्तु अगर सन्तान माँ को किसी भी प्रकार से बहुत ही बुरी तरह से द्रवित कर देता है तो माँ भी अपना आपा खो बैठती है| ऐसे में इस श्राप से मुक्त होने के लिए पुरुष को रामेश्वर्म तीर्थ मे स्नान करना चाहिए। और फिर सामर्थ्य के अनुसार दूध से भरा चांदी का कोई बर्तन दान करना चाहिए। इस प्रकार दान-पूजन करने से मातृश्राप से मुक्ति मिलती है और सुंदर-चरित्रवान बच्चा जन्म लेता है।

भातृश्राप

पिछले या इसी जन्म में अगर आपके किसी कार्य से दुखी होकर अगर आप भाई से शापित होते है तो आपके घर में बच्चे नहीं जन्म लेंगे । भातृश्राप से मुक्त होने के लिए भगवान विष्णु का पूजन करे । श्री लक्ष्मी नारायण की कथा का श्रवण करें और यमुना या कृष्णा नदी में स्नान करे। पीपल का कोई वृक्ष लगाएं और उसका दैनिक ध्यान रखे| इन सभी के बाद आपको अवश्य सन्तान सुख प्राप्त होगा ।

ब्राह्मण से मिला श्राप

ब्राह्मणों से मिला कोई भी श्राप बहुत ही अशुभ साबित होता है| ऐसे में ब्राह्मण द्वारा किसी श्राप का उपाय करना बहुत जरुरी होता है। ब्राह्मण के श्राप से कलयुग बचना चाहिए। श्राप से मुक्ति पाने के लिए चांद्रायण व्रत रखना चाहिए। और अगर संभव हो तो किसी योग्य दान में गाय भेट करे । ऐसा करने से आप श्रापमुक्त होंगे और आपको एक सुंदर पुत्र की भी प्राप्ति होगी।

पत्नि श्राप

ये शब्द आपको जरा हैरान कर सकता है के आखिर पत्नी क्यों अपने ही पति को श्राप दे सकती है| परन्तु पिछले या इसी जन्म में अगर आप पत्नी द्वारा श्रापित हैं तो आपके घर सन्तान के आने का कोई तरीका नही। ऐसे में अपनी सन्तान की किलकारियां सुनने के लिए श्री लक्ष्मीनारायण जी का विधिवत पूजन करना चाहिए। और गाय या कन्यादान से आप इस श्राप की मुक्त हो सकते हैं।

प्रेतजनित श्राप

प्रेत श्राप अक्सर निस्संतानता के लिए काफी अधिक ज़िम्मेदार होता है| आपको भी प्रेत की अनुभूती हो रही है तो ऐसे में आपको किसी भी तीर्थ में पूर्वजों का विधिवत श्राद्ध करा देना चाहिए और ब्राहम्णों को भोजन भी करा देना चाहिए।