किन्नर आखाडा नागा साधू आदि के बाद अब कुम्भ मेले में ‘मचान वाले बाबा’, की हो रही चर्चा, ये है इनकी खासियत

हमारी संस्कृति में कई ऐसे पर्व मनाए जाते हैं जिनका अपने आप में बहुत ही बड़ा महत्व है। इन्हीं में से एक कुंभ का मेला भी है जहां तीन नदियों का संगम होता है। हमारे शास्त्रों में भी कुंभ मेले का विशेष महत्व बताया गया है शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण में सूर्य के उदय होने के बाद सभी देवी देवता जाग्रित हो जाते है। ऐसे में प्रयागराज पर स्नान करना बहुत ही शुभ माना गया है। भारत देश में कुंभ का बहुत ही बड़ा महत्व है, जहां लोग बहुत ही बड़े पैमाने पर इकट्ठा होकर इसे बेहद विशाल और विशेष बना देते हैं। प्रयागराज में चल रहे इस पर्व को सभी लोग कुम्भ मेले के नाम से जानते है और जितना बड़ा इसका नाम है उतने ही अनोखा यह मेला है जिसमे देश के कोने कोने से अजीबो गरीब नागा साधू, बाबा आदि लोग आते हैं जो अपनी खासियत और प्रतिभा की वजह से बस हर तरफ चा जाते हैं।

हर बार मनाया जाने वाला यह पर्व इस बार बेहद विशाल और बढ़े पैमाने पर मनाया जा रहा है। जहां बाहरी देशो से भी लोग आकर इस मेले में सम्मिलिती निभा कर इस कुम्भ मेले का हिस्सा बन रहे है। लेकिन इस बार प्रयागराज में चल रहे दुनिया के सबसे बड़े कुम्भ मेले में जहाँ महासंगम में देश-विदेश के कई लोग शामिल हुए हैं तो वही कुंभ में उपस्थित साधु-संत लोगों का काफी ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। ऐसे में आज हम आपको इन्हीं में एक बाबा के बारे में बताने जा रहे है, जो मचान वाले बाबा के नाम से जाने जाते है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें की वैसे तो इनका असली नाम श्री महंत राम कृष्णदास त्यागी जी महाराज है लेकिन ये बाबा, मचान वाले बाबा के नाम से ही प्रसिद्ध है। असल में आपको बता दे कि मचान वाले बाबा साल 1975 से ही साधना कर रहे हैं और तब से अब तक वह बहुत ही कम बार जमीन पर अपने कदम रखे हैं और वह मचान पर रहकर ही सभी से मिलते हैं और सभी लोगो को आशीर्वाद देते हैं और तरह तरह से उनके पास आने वाले लोगों की मदद करते हैं।

बताते चलें की इस बार कुंभ मेले में ‘मचान वाले बाबा’ का भी पंडाल लगा हुआ है, जो दिन के 24 घंटे श्रद्धालुओं के लिए खुला हुआ है। आपकी जानकारी के लिए यह भी बता दे कि अपने पंडाल के माध्यम से बाबा लगभग 5,000 श्रद्धालुओं को बिना शुल्क के कई तरह की मदद कर रहे हैं। वह कुंभ में शामिल हुए श्रद्धालुओं का बिना किसी शुल्क के इलाज करने के साथ उन्हें दवाइयां भी उपलब्ध करा रहे हैं। इसके साथ ही उनके पंडाल में लगभग 5000 लोगों के रहने की भी व्यवस्था है। आपको बता दे कि साधु-संतों के अलावा कुंभ में नागा साधु भी काफी सुर्खियों में बने हुए है।

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