कुम्भ मेला 2019: माघ मास में प्रयाग की पावन भूमि पर करें इन 3 चीजों का दान, होगी अक्षय फल की प्राप्ति

पौष मास की पूर्णिमा से माघ मास की पूर्णिमा तक माघ मास का स्नान किया जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार माघ मास में शीतल जल में डुबकी लगाने से मनुष्य पापमुक्त हो स्वर्ग चले जाते हैं। माघ मास के स्नान का सर्वाधिक महत्व तीर्थराज प्रयाग में है। महाभारत के अनुसार माघ मास की अमावस्या (मौनी अमावस्या) को प्रयागराज में 3 करोड़ 10 हजार तीर्थों का समागम होता है। इस वर्ष मौनी अमावस्या 10 फरवरी को पड़ रही है। प्रयाग के अलावा काशी, नैमिषारण्य, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार तथा अन्य पवित्र तीर्थों एवं नदियों में भी स्नान का बड़ा महत्व है। यह स्नान सूर्योदय से पूर्व किया जाता है।

पद्मपुराण के अनुसार माघ मास में व्रत, दान, तपस्या से भगवान विष्णु को उतनी प्रसन्नता नहीं होती जितनी माघ मास के स्नान से। इसलिए स्वर्ग लाभ, सभी पापों से मुक्ति तथा भगवान वासुदेव की प्राप्ति के लिए प्रत्येक मनुष्य को माघ स्नान करना चाहिए। यदि संपूर्ण मास में स्नान न कर सकें तो तीन दिन अथवा एक दिन माघ स्नान व्रत करना चाहिए। निर्णय सिंधु में कहा गया है- ‘मास पर्यन्त स्नानासम्भवे तु त्र्यहमेकाहं वा स्नायात।’ जो मनुष्य चिरकाल तक स्वर्ग लोक रहना चाहते हैं, उन्हें माघ मास में सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर अवश्य तीर्थ स्नान करना चाहिए|

प्रयागराज, जहां कभी भगवान ब्रह्मा ने विशाल यज्ञ किया था। जहां स्वयं भगवान श्रीराम,लक्ष्मण और सीता ने स्नान और पूजन किया था, उस पावन भूमि पर माघ महीने में स्नान और दान का विशेष महत्व है। जब इसी पावन भूमि पर कुंभ मेला लगा हो और माघ का महीना हो तो दान का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में हर कोई इस पावन भूमि पर, पवित्र तिथि और पवित्र घड़ी पर दान करने के लिए विशेष रूप से पहुंचता है। त्रिवेणी संगम पर स्नान-दान के बारे में पुराणों में विशेष रूप से वर्णन मिलता है। मान्यता है कि गंगा-यमुना और सरस्वती के पावन संगम तट पर माघ महीने में किया गया दान कई जन्मों के पापों का शमन कर अक्षय पुण्य प्रदान करता है।इसीलिए आज हम आपको कुछ ऐसे दान के बारे में बताने जा रहे है जिसे माघ मास में यदि किया जाये तो इससे अक्षय फल की प्राप्ति होती है |तो आइये जानते है कौन से है वो दान

प्रयाग में गोदान का महत्व

सब तरह के कल्याण और सभी के उपकार के लिए गोदान उपयोगी है। प्रयाग में यह दान करना चाहिए। तीर्थराज को यह दान सबसे ज्यादा अच्छा लगता है। प्रयाग माहात्म्य में कहा गया है कि जो श्रेष्ठ विमान पर चढ़कर दिव्य अलंकारों से विभूषित होकर स्वर्ग जाना चाहे उसे गोदान करना चाहिए। यह दान दैहिक, दैविक और भौतिक पापों को नष्ट करता है। यह दान देने वाले को वैकुण्ठ ले जाता है। यह उसके पितरों को मोक्ष देता है।

प्रयाग में दीपदान का विशेष महत्व

पुराणों में त्रिवेणी संगम यानी प्रयाग पर स्नान-दान का वर्णन मिलता है। पुराणों के अनुसार माना जाता है की गंगा-यमुना और सरस्वती के संगम स्थान पर माघ महीने में दान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है, इस जगह दीपदान देने से व्यक्ति के पापों का नाश हो जाता है

प्रयाग में फल दान का महत्व

कुंभ में फलदान का विशेष महत्व होता है यह विशेष फलदायी भी माना जाता है। फलदान करने से पुत्र प्राप्त होता है।