देखें तस्वीरे : रात दिन काँटों के बिस्तर पर सोते है ये बाबा, कच्चे दिल वाले देखकर सहम उठते है

कुम्भ मेला हिन्दू धर्म का एक महत्त्वपूर्ण पर्व है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु कुम्भ पर्व स्थल- हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में स्नान करते हैं। इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति बारहवें वर्ष में इस पर्व का आयोजन होता है। मेला प्रत्येक तीन वर्षो के बाद नासिक, इलाहाबाद, उज्जैन और हरिद्वार में बारी-बारी से मनाया जाता है। इलाहाबाद में संगम के तट पर होने वाला आयोजन सबसे भव्य और पवित्र माना जाता है। इस मेले में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते है। ऐसी मान्यता है कि संगम के पवित्र जल में स्नान करने से आत्मा शुद्ध हो जाती है।

यहाँ माघ के महीने में गंगा की पवित्र धारा में गोते लगाने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से कई तरह के साधु-सन्यासी आते हैं। कुछ लोग यहाँ पुण्य कमाने के लिए आते हैं तो कुछ अपना पाप उतारने के लिए आते हैं।हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर मनुष्य अपने समस्त पापों को धो डालता है। पवित्र गंगा-यमुना में डुबकी लगाने से मनुष्य और उसके पूर्वज दोषमुक्त हो जाते हैं। प्रयागराज कुंभ 15 जनवरी (मकर संक्रांति) से शुरू हुआ है और यह 5 मार्च (महाशिवरात्र‍ि) तक चलेगा।  बता दें कि इस कुंभ में लाखों करोड़ों की संख्या में साधु-संत जुट रहे हैं।

भारत एक बड़ा ही विचित्र देश है। प्राचीनकाल से ही इस देश को साधू-संतों और धर्म का देश माना जाता रहा है। यहाँ की पवित्र धरती पर कई महान साधू-संतों ने जन्म लिया और लोगों को अच्छाई का पाठ पढ़ा गए। इन्ही साधुओं ने हिन्दू धर्म का प्रचार पूरी दुनिया में किया, जिसकी वजह से आज हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग दुनिया के हर कोने में मौजूद हैं। सिद्धि प्राप्त किये हुए इन साधुओं के कारनामें देखकर कई बार आपको अपनी आँखों पर भी यकीन नहीं होगा।

आज के समय में भी कई ऐसे संत-महात्मा हैं, जिन्हें इस संसार के मोह-माया से कोई मतलब नहीं है और इन्ही में से एक है बाबा लक्ष्मण राम जो की हमेशा काटों के बिस्तर पर ही लेते रहते है और देखने वालों के मुंह से आह निकल जाती है |काँटों की शैय्या पर सोने की सिद्धि प्राप्त कर चुके रामा बाबा को लोग अब कांटों वाले बाबा के नाम से जानने लगे हैं। ये बाबा आगरा के रहने वाले हैं। इन्होने अपने बारे में बताया कि, “18 साल की उम्र में गलती से गौहत्या का पाप लग गया। उसके बाद से इस तरह से उसका प्रायश्चित करने की कोशिश कर रहा हूँ। दर्द होता है, लेकिन सहन कर लेता हूँ। माघ और कुम्भ मेले में हर साल यहाँ आता हूँ।”

उन्होंने आगे बताया कि जो लोग चढ़ावे में चढ़ाते हैं, उसका इस्तेमाल मथुरा में गायों की देख-रेख पर खर्च किया जाता है। इसके साथ ही वो भंडारा भी चलाते हैं। इस बार वो 6 दिन पहले संगम नगरी आये थे और मौनी अमावस्या पर अक्षयवट मार्ग पर पहले दिन लेते थे। कांटों वाले बाबा ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में जहाँ बड़ा धार्मिक आयोजन होता है, वहाँ वह जाते हैं।

बाबा को कुंभ के मेले और दूसरे बड़े धार्मिक आयोजनों पर देखा जाता है. सावन के चौथे सोमवार पर इन्हें महादेव घाट के किनारे लोगों ने कांटों पर लेटे हुए देखा. उधर से जो भी गुजरा उसके मुंह से आह शब्द निकल गया. इन्हें कांटों पर लेटा हुआ देखा लोग सिहर गए. भक्तों ने इनपर चढ़ावा चढ़ाया और आशीर्वाद लिया.