कहीं आपकी बदनसीबी की वजह आपके घर में लगा शीशा तो नहीं, यहाँ जाने कैसे

चाहे ऑफिस हो या फिर किसी फंक्शन आदि में जाना हो, खुद को व्यस्थित करने या यूं कहें की सजने सवारने के लिए आपको शीशा यानी की मिरर की जरूरत तो पड़ती ही है। ताकि जिस जगह पर आ जा रहे है वहाँ पर आपको देख कर कोई भी आपकी कोई कमी निकालकर आपका मज़ाक न उड़ाए साथ ही साथ तारीफ भी तो बटोरनी है तो इसके लिए भी तो खुद को अच्छे से तैयार करना ही पड़ेगा और शीशे में देखे बिना आप खुद को तैयार कर नहीं सकते।

अक्सर देखा जाता है की किसी भी जरूरी काम के लिए जब भी कभी हम घर से निकलते हैं तो एक बार शीशे के सामने कुछ पल के लिए ही सही मगर खुद को खड़े होकर एक बार निहारते जरूर होंगे। यानी एक तरह से देखा जाए तो दर्पण हर किसी के जीवन का एक बहुत ही अहम हिस्सा है। मगर क्या आपको इस बात की जानकारी है की आपका चेहरा संवारने वाला दर्पण कई बार आपकी किस्मत भी बिगाड़ सकता है। जी हाँ, ऐसा हो सकता है और ऐसा हम या कोई और नहीं बल्कि हमारा वास्तु विज्ञान कहता है। अब ये कैसे और किन ब्ंदुओन पर कहता है इसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

आपकी जानकारी के लिए बताते चलें की वास्तु विज्ञान में घर के निर्माण और घर के अंदर राखी गयी वस्तुओं की दिशा और स्था आदि के बारे में काफी गहराई से बताया गया है और इन सभी बातों का हमारे जीवन से बहुत ही गहरा संबंध भी होता है। बता दें की हमारे घर में लगा दर्पण सकारात्मक और नकारात्मक उर्जा में फर्क नहीं करता है उसके सामने जिस भी प्रकार की उर्जा आती है वह उसे दिस उसी तरह से वापस लौटा देता है। यही वजह है की दर्पण को वास्तु विज्ञान में काफी ज्यादा महत्व दिया जाता है। वास्तुशास्त्र के जानकारों का ऐसा मानना है की दर्पण को लेकर की गई कई चोटी बड़ी गलतियां अक्सर ही लोगों के स्वास्थ्य, धन तथा तरक्की के रास्ते में बाधा बनती है और यही कारण है कि गहर में मौजूद दर्पण का इस्तेमाल करते समय कई सारी बातों का सावधानी से ध्यान रखना चाहिए।

शयन कक्ष

वास्तु के अनुसार कभी भी अपने बेडरूम में शीशा नहीं लगाना चाहिए। अगर ऐसा करना कठिन लग रहा हो तो दर्पण को ऐसी जगह लगाएं जहां से सुबह उठते ही आपको आपकी सूरत ना दिखाई दें। यानी दर्पण बिस्तर के सामने नहीं होना चाहिए।

 

चटका हुआ शीशा

सबसे पहले हम आपको बता दें की यदि आपके घर का दर्पण यानी की शीशा चटक गया हो तो बिना सोचे समझे उसे अपने घर से हटा दें। वास्तु के अनुसार माना जाता है की दरार या चटके हुए शीशे से घर में लौटने वाली रोशनी बहुत हु गहरा नकारात्मक प्रभाव डालती है और इसके वजह से परिवार के सदस्यों के बीच कलह उत्पन्न होता है और दूरियां भी बढ़ती हैं। आपको यह भी बता दें की ऐसे दर्पण में यदि आप अपना चेहरा देखते हैं तो इससे आपके स्वास्थ्य पर भी काफी गहरा प्रभाव पड़ता है।

उत्तर पूर्व दिशा में शीशा

जब भी कभी आप अपने घर में दर्पण लगा रहे हो तो दिशा का ध्यान रखना बहुत ही ज्यादा आवश्यक है, बता दें की दर्पण लगते वक़्त आपको हमेशा अपने घर के उत्तर, पूर्व या फिर उत्तर पूर्व दिशा का ही चुनाव करें, क्योंकि इन दिशाओं को वास्तु में काफी ज्यादा शुभ माना गया है। बताया जाता है की यदि गहर में इन जगहों पर शीशा लगाया जाए तो इससे घर में हमेशा सकारात्मक उर्जा का संचार होता है।

गोल आकृति

आपकी जानकारी के लिए यह भी बताते चलें की घर में कभी भी गोल आकृति का दर्पण नहीं लगाना चाहिए, ऐसा वास्तु विज्ञान के उचित नहीं माना गया है। गहर में हमेशा आयताकार और वर्गाकार दर्पण का प्रयोग किया जाना चाहिए और इसे ही वास्तु के अनुसार शुभ और हितकारी माना गया है।

धूल मिट्टी

आपको यह भी बताना चाहेंगे की घर में लगा हुआ शीशा या दर्पण जिसमें आप अक्सर कर के अपनी छवि देखते हैं उस पर कभी धूल मिट्टी आदि नहीं जमने देना चाहिए। माना जाता है की अगर कभी आपके घर के नैऋत्य कोण यानी की दक्षिण पश्चिम दिशा में बाथरूम है तो उसके पूर्वी दीवार पर एक वर्गाकार दर्पण अवश्य लगाएं, वस्तु के अनुसार ऐसा करने से घर में मौजूद सभी तरह का वास्तु दोष दूर होता है।

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