जाने आखिर देश के राष्ट्रपति की कार पर क्यों नहीं होती नंबर प्लेट, मंत्रियों को भी नहीं पता होगी इसके पीछे की वजह

यूँ तो जब से मोदी सरकार बनी है, तब से देश में कई बदलाव देखने को मिले है. ऐसे में मोदी सरकार ने मंत्रियों को लेकर भी एक बड़ा फैसला किया है. जी हां इस फैसले के अनुसार मोदी सरकार ने मंत्रियों की गाडी से लाल बत्ती को हटवा कर वीवीआईपी प्रथा को खत्म करने का बड़ा कदम उठाया है. इसके मुताबिक अब मंत्रियों की गाडी पर लाल बत्ती नहीं लगाई जाएगी. हालांकि हमारे देश में वीवीआईपी की प्रथा कितनी खत्म हुई है, ये बात तो आप सब अच्छी तरह से जानते है. जी हां तभी तो यहाँ आम आदमी के लिए अलग नियम होता है और माननीय लोगो के लिए अलग नियम बनाया जाता है. जैसे कि भारत के राष्ट्रपति की गाडी पर नंबर प्लेट नहीं होती.

अब जरा सोचिए कि अगर यही गलती किसी आम इंसान ने की होती, तो क्या उसे कानून द्वारा सजा नहीं दी जाती. अब ये तो सब जानते ही है कि हर आम इंसान की गाडी पर नंबर प्लेट होना बेहद जरुरी है, क्यूकि गाडी पर नंबर प्लेट का न होना एक बड़ा अपराध माना जाता है. ऐसे में राष्ट्रपति की गाडी पर नंबर प्लेट का न होना बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है. यक़ीनन आप सब ये जानना चाहते होंगे कि आखिर देश के राष्ट्रपति के लिए इतना अलग नियम क्यों बनाया गया है. बरहलाल आज हम आपको इसके पीछे की वजह के बारे में जरूर बताएंगे. इसके पीछे की वजह जान कर आप भी हैरान रह जायेंगे.

सबसे पहले तो आप ये सोचिए कि अगर आप अपनी गाडी को बिना किसी रजिस्ट्रेशन नंबर के बाहर लेकर जायेंगे तो ऐसे में आपका क्या हाल होगा. इन हालातो में पुलिस न केवल हमारी गाडी को अपने कब्जे में ले लेगी, बल्कि अलग से चालान भी काटेगी. मगर देश के राष्ट्रपति के लिए ऐसा कोई कानून नहीं बनाया गया. वैसे आपको जान कर हैरानी होगी कि हमारे देश के राष्ट्रपति के पास एक नहीं दो नहीं बल्कि चौदह ऐसी गाड़ियां होती है, जिन पर नंबर प्लेट नहीं होती. तो चलिए अब आपको इसके पीछे की वजह के बारे में भी बताते है. गौरतलब है कि किसी भी गाडी को सड़क पर चलाने के लिए वास्तव में सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन की जरूरत पड़ती है. जो सरकार की तरफ से ही जारी किया जाता है. इसे आम भाषा में आरसी भी कहा जाता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि यही रजिस्ट्रेशन नंबर आपकी नंबर प्लेट पर लिखा होता है. इसके इलावा हम आपको बता दे कि यह रजिस्ट्रेशन नंबर दिल्ली में डीएल, चंडीगढ़ में सीएच, उत्तर प्रदेश में यूपी, उत्तराखंड में यूके, पंजाब में पीबी और बिहार में बीआर से शुरू होता है. यानि शहरों के अनुसार ही गाडी का नंबर प्लेट बनाया जाता है. गौरतलब है कि किसी भी गाडी का रजिस्ट्रेशन नंबर पंद्रह साल के लिए ही मान्य होता है. हालांकि राष्ट्रपति की गाडी पर नंबर प्लेट लगाने को लेकर थोड़ा अलग ही कानून बनाया गया है.

दरअसल ब्रिटिश सिस्टम के अनुसार किंग कैन डु नो रॉन्ग जो कि एक राजा था, वो कभी कुछ गलत नहीं कर सकता. यही वजह है कि राष्ट्रपति और अन्य माननीय मंत्रियों की गाड़ियों पर रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं होता. यानि ब्रिटिश सिस्टम को मानते हुए राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपाल के साथ साथ बाकी वीवीआईपी गाड़ियों पर भी नंबर प्लेट नहीं लगाया जाता है.

बरहलाल ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि हमारे देश में आज भी आम आदमी और वीवीआईपी लोगो को अलग नजर से आंका जाता है.