आज काल भैरव जयंती के दिन ,काले कुत्ते को खिला दे बस ये एक चीज,होगी सभी इच्छाए पूर्ण ,मिलेगा अपार धन लाभ

भौरों बाबा जो कि शिव का रुप हैं उनकी उत्पत्ति का दिन बड़ी धूम धाम से मनया जाता है और उसे ही काल भैरव जयंती कहा जाता है। काल भैरव अष्टमी या जयंती कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की आठवीं को आती है। हिंदू मान्यता के मुताबिक भैरों बाबा शिव के ही रुप हैं और उनकी उत्पत्ति शिव के खून से हुई है। शिव के खून के दो भाग हुए, पहले से बटुक भैरव और दूसरे से काल भैरव उत्पन्न हुए। भैरव, शिव का प्रचंड रुप दर्शाया गया है।

भैरव का मतलब होता है भय को हरने वाला यानि भय को खत्म करने वाला। भैरव अष्टमी को पूरे देश में धूम धाम से मनाया जाता है और मंदिरों में भैरों बाबा के दर्शन किये जाते हैं। जो भी पाप करता है उसे इस दिन दंड मिलता है। चाहे वो देवता हों या इंसान, पापियों को बख्शा नहीं जाता। वहीं जिनका मन सच्चा होता है उनके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। भैरों बाबा की कृपा हो जाए तो बुरी शक्तियां दूर से ही देख कर भाग जाती हैं। ना तो नेगेटिविटी रहती है और ना ही काम में कोई अड़चन आती है। हर तरह के दु:ख दूर हो जाते हैं।इस साल काल भैरव अष्टमी दो दिन पड़ रही है जो 29 नवंबर से शुरू होकर 30 नवंबर तक मनाई जाएगी.

भैरव पूजा का महत्व

भगवान शिव के रूप काल भैरव की पूजा करके हर तरह की रुकावट और बुरे प्रभाव को खत्म किया जा सकता है। इस दिन भगवान भैरव के साथ साथ, शिव और मां पार्वती की भी पूजा होती है। कुत्ता जो कि भैरव जी का वाहन है उनको दूध चढ़ाया जाता है। भक्त इस दिन व्रत भी रखते हैं और रात को जागरण करते हैं।भगवान कालभैरव को तंत्र का देवता माना गया है। तंत्र शास्त्र के अनुसार, किसी भी सिद्धि के लिए भैरव की पूजा अनिवार्य है। इनकी कृपा के बिना तंत्र साधना अधूरी रहती है। इनके 52 रूप माने जाते हैं। इनकी कृपा प्राप्त करके भक्त निर्भय और सभी कष्टों से मुक्त हो जाते हैं।

शास्त्रों के अनुसार कालभैरव को प्रसन्न कर व्यक्ति विभिन्न लाभ पा सकता है। जैसे कि जीवन में सफलता, रुके हुए कार्य अपने आप बनने लगते हैं, बीमारियां और दरिद्रता दूर रहती है, जिस भी कार्य के लिए परिश्रम किया जाए उसमें सफलता ही हाथ लगती है।

पहला उपाय

भैरव जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर, स्नानादि करके किसी प्राचीन भैरव मंदिर में जाएं। वहां जाकर भैरवजी का दूध से अभिषेक करें। ऐसा करने से वे प्रसन्न होते हैं।

दूसरा उपाय

मंदिर में भैरव जी की मूर्ति के आगे तेल का दीपक प्रज्वलित करें। इसके बाद उन्हें इमरती व मदिरा का भोग लगाएं।

तीसरा उपाय

भैरव जयंती शुक्रवार के दिन है, तो भैरव मं‍दिर में गुलाब, चंदन और गुगल की खुशबूदार 33 अगरबत्ती अवश्य जलाएं। यह एक खास प्रकार का शास्त्रीय टोटका है, जो जीवन में खुशहाली लाने के लिए किया जाता है। इसे आप हर महीने की भैरव अष्टमी पर भी कर सकते हैं।

चौथा उपाय

मन्नत पूर्ति के लिए विधि के साथ भैरवनाथ को चढ़ावा चढ़ाएं – रोली, सिन्दूर, रक्तचन्दन का चूर्ण, लाल फूल, गुड़, उड़द का बड़ा, धान का लावा, ईख का रस, तिल का तेल, लोहबान, लाल वस्त्र, भुना केला, सरसों का तेल भैरव जी की प्रिय वस्तुएं हैं। इन्हें भैरव जी पर अर्पित करने से मुंहमांगा फल प्राप्त किया जा सकता है।

पांचवां उपाय

भैरव जी की सवारी है काला कुत्ता, इसलिए इसदिन इसे प्रसन्न करना ना भूलें। काले कुत्ते को इमरती खिलाएं व कच्चा दूध पिलाएं।