IPS बन कर आंतकवादियों को सबक सिखाना चाहती है कसाब की बेटी, जाने आखिर कैसे 26 नवंबर 2012 के बाद बदल गई इस परिवार की जिंदगी

आज हम आपको उस दिन की याद दिलाना चाहते है, जब सरहद पार से आएं कुछ आंतकियों ने मुंबई शहर को पूरी तरह से दहला दिया था. जी हां आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इस हमले के दौरान नाजाने कितने ही लोगो ने अपनी जान गंवाई थी. यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो इस हमले ने मुंबई शहर को वो जख्म दिए है, जो अब कभी नहीं भर सकते. गौरतलब है कि इस हमले में करीब एक सौ चौसंठ लोगो ने अपनी जान गंवाई थी. तो वही इस हमले में नाजाने कितने हजारो लोग घायल हुए थे. बरहलाल इस हमले को दस आतंकवादियों ने मिल कर अंजाम दिया था. हालांकि दस में से केवल एक आंतकवादी जिसका नाम अजमल साहब था, वो ही जिन्दा बचा था. जिसे साल 2012 में भारत के कानून द्वारा फांसी दे दी गई थी.

वैसे आपको जान कर हैरानी होगी कि एक लड़की जिसका नाम देविका रोटावन है. वो इस हमले की गवाह बनी. दरअसल हमले के समय देविका की उम्र महज नौ साल सात महीने थी. हालांकि अब वो बड़ी हो चुकी है. मगर यहाँ अफ़सोस की बात तो ये है कि कुछ लोग देविका को ही कसाब की बेटी कह कर बुलाने लगे. जी हां कसाब वही आंतकवादी है जिसे देविका ने पहचान कर फांसी की सजा दिलवाई थी. फ़िलहाल देविका पूरे अठारह साल की हो चुकी है और अब वो एक आईपीएस अफसर बन कर आंतकवादियों को सबक सीखाना चाहती है. तो चलिए अब हम आपको इस हमले और देविका की जिंदगी से जुडी कुछ खास बातों से रूबरू करवाते है.

इस बारे में देविका का कहना है कि इस हमले के बाद से उसकी जिंदगी मानो ठहर सी गई थी. जी हां उसका कहना है कि उसके परिवार को रहने के लिए कोई मकान तक नहीं मिल रहा था. यहाँ तक कि लोगो को भी बार बार आंतकी हमले का डर सता रहा था. इसके बाद देविका ने बताया कि वो और उसका परिवार जहाँ भी जाता था, वहां उसे कसाब की बेटी कह कर बुलाया जाता था. बरहलाल देविका का कहना है कि अब अगर आप किसी से पूछेंगे कि वो मुंबई हमले वाली लड़की कहाँ रहती है. तो लोग आपको कसाब की बेटी कह कर मेरे पास ही ले आएंगे. इसके इलावा देविका का कहना है कि वो और उसका परिवार उस रात को कभी नहीं भूल पाएंगे.

जी हां देविका कहती है कि उस रात वह अपने पापा और भाई के साथ सीएसटी स्टेशन पहुंची थी. जहाँ हम अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे. बस इसी बीच उसका भाई टॉयलेट के लिए गया था और तभी गोलियां चलनी शुरू हो गई. यहाँ तक कि एक गोली उसके पैर में भी लग गई थी. बता दे कि तेज दर्द के कारण वह काफी समय तक बेहोश भी रही. इसके बाद जब देविका को होश आया तब उसने खुद को अस्पताल में पाया. इसके बाद देविका ने बताया कि करीब एक महीने तक अस्पताल में उसका इलाज चलता रहा. इसके बाद उसे किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया. जहाँ उसकी कई बार सर्जरी भी हुई. इसके इलावा देविका का कहना है कि उसके पापा को पाकिस्तान से फोन आते थे. इस दौरान उन्हें फोन पर ब्यान बदलने के लिए काफी धमकाया जाता था.

ऐसे में जब देविका और उसका परिवार नहीं माना तो उन्हें जान से मारने तक की धमकी भी दी जाती थी. हालांकि इन सब के बावजूद भी देविका बैसाखी के सहारे कोर्ट तक पहुंची और वहां जाकर कसाब के खिलाफ गवाही भी दी. मगर आपको जान कर हैरानी होगी कि इसके बाद देविका के रिश्तेदारों ने उसके परिवार से काफी दूरी बना ली थी. यहाँ तक कि उनके किसी रिश्तेदार के घर अगर कोई फंक्शन भी होता था, तब भी उन्हें घर के बाहर ही रखा जाता था. ऐसे में देविका ये सोचने के लिए मजबूर हो गई थी कि आखिर उसकी क्या गलती है. वही अगर खबरों की माने तो ऐसा कहा जाता है कि इस हमले के चार साल बाद तक देविका को किसी स्कूल में एडमिशन तक नहीं मिला था.

जी हां देविका फ़िलहाल ग्यारहवीं क्लास में पढ़ती है और अब उसका लक्ष्य केवल आईपीएस अफसर बनना ही है. अब यूँ तो कई संस्थाओ ने देविका और उसके परिवार की मदद करने की बात कही थी, लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की. जिसके कारण उनके परिवार के हालात काफी बिगड़ते गए. यहाँ तक कि देविका को टीवी हो गया और इस हालत में भी वह संघर्ष करती रही. बता दे कि देविका के इलाज के दौरान उसका भाई भी बीमार हो गया और उसका भी ऑपरेशन करवाना पड़ा.

गौरतलब है कि देविका के पिता का ड्राई फ्रूट का बिज़नेस था. मगर जब लोगो ने देविका के पिता के साथ काम करने से मना कर दिया तो उनका कारोबार भी एकदम ठप्प हो गया. हालांकि इस हमले के बाद देविका को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. मगर देविका के पिता नटवरलाल का कहना है कि पुरस्कारों से पेट नहीं भरता. इसके साथ ही देविका के पिता को इस बात की चिंता है कि अब उनकी बेटी से कौन शादी करेगा, क्यूकि अब सब लोग आंतकवादियों के डर से हमसे दूर ही रहते है.

बरहलाल हम आपसे जानना चाहते है कि क्या देविका ने गवाही देकर वास्तव में कोई बड़ी गलती कर दी.