रास्ते में शव यात्रा दिखे तो बस बोलदे ये तीन नाम ,तुरंत होगी सारी मन्नत पूरी

इस धरती पर जिस किसी ने  भी  जन्म लिया है उसकी मृत्यु तो एक ना एक दिन निश्चित  है  और हम सभी जानते है की मृत्यु इस  संसार का अटल सत्य है जिसे कीसी भी कीमत पर झुठलाया नहीं जा सकता है | जैसा की हम सभी  जानते है की  हिन्दू शास्त्रों के अनुसार मनुष्य जीवन में 16 संस्कारों का वर्णन किया गया है, जिनमें जन्म से लेकर अंत्येष्टि तक हर पड़ाव शामिल है। अंत्येष्टि, यह जीवन का आखिरी पड़ाव होता है इसलिए इसे अंतिम संस्कार भी कहा जाता है जिसमे शवयात्रा निकलना एक पारंपरिक प्रथा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार  शवयात्रा निकलना मृत इंसान की आत्मा की शान्ति के लिए जरुरी होता है।

आज हम आपको  शवयात्रा  से   जुडी कुछ ऐसी जानकारी देने वाले है जिनका यदि आप पालन करते हैं तो  आपको ये शवयात्रा भी मनोवांछित फल प्रदान कर सकती है  किन्तु इसके लिए  आपको  कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होता है |आमतौर पर आपने देखा होगा कि शव को किसी गाड़ी में लेकर जाया जाता है या फिर सगे संबंधियों द्वारा अर्थी या फिर लकड़ी की कुर्सी पर श्मशान तक पहुंचाया जाता है|

अक्सर आपने देखा होगा की शवयात्रा देख कर कुछ लोग रास्ता बदल देते है तो वही कुछ लोग इसे अनदेखा कर आगे निकल  जाते है  लेकिन आपको  बता दे की कभी भी हमे ऐसा नहीं करना चाहिए बल्कि जब भी कही रस्ते में शवयात्रा दिखाई दे तो उसे अनदेखा ना करें बल्कि दो मिनट के लिए तुरंत रुक जाएँ और प्रणाम जरूर करें और शिव या जिन भी भगवान् को आप मानते है उनके नाम का जाप एक बार अवश्य  करें ऐसा करने से आपकी सभी इच्छा पूरी होती है और आपके सभी दुखों का अंत भी होता है |

धर्म शास्त्रों  में ऐसा उल्लेखित है की  जब भी मृत आत्मा अपना शरीर त्याग कर जाती है वह अपने साथ उस व्यक्ति के जो उसे प्रणाम करता है के दुखों, कष्टों एवं उसके अशुभ लक्षणों को भी अपने साथ ले जाती है|धार्मिक दृष्टिकोण के अलावा ज्योतिष शास्त्र में भी शवयात्रा को देखना शुभ माना जाता है.

शवयात्रा दिखने पर कुछ लोग दो मिनट का मौन धारण कर मन से  मृतआत्मा की शान्ति के लिए भी प्रार्थना करते है। शास्त्रों के अनुसार ये भी कहा गया ऐसा करने से शरीर छोड़ चुकी आत्मा को शान्ति मिलती है।

ज्योतिष के अनुसार  जीवन में 16 संस्कारों  में से शवयात्रा को काफी पवित्र माना गया है। कहा जाता है की शवयात्रा में शामिल हुए लोगों के कष्टों का निवारण हो जाता है।मनुस्मृति में ऐसा माना जाता है कि जब भी किसी व्यक्ति की शव यात्रा निकले तो रास्ते में गॉव जरुर पड़ना चाहिए.

हमारे पुराणों में बताया गया है की यदि कोई व्यक्ति किसी ब्राम्हण के शव को उठाता है तो उस व्यक्ति को उसके एक कदम पर एक यज्ञ पुण्य का फल मिलता है और उसके केवल पानी में एक डुबकी लगाने से सारे पापों का अन्त हो जाता है।

हिन्दू शास्त्रों में ऐसा माना जाता है अगर कोई भी ब्राम्हण अपने लाभ या स्वार्थ के लिए किसी ब्राम्हण की अर्थी को कान्धा देता है तो उसे अगले दस दिनों तक अशुद्ध माना जाता है तथा उससे उन दिनों में किसी भी प्राकार का धार्मिक कार्य नहीं कराना चाहिए।