यूनेस्को ने नालंदा को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में किया शामिल

 

तुर्की के इस्तांबुल शहर में हुए सम्मलेन के दौरान, गठित समिति द्वारा 27 ऐसी जगहों की समीक्षा हुई जो एतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखतीं हैं।

बिहार के लिए ये किसी उत्सव से कम नहीं है, क्यों कि बोध गया मंदिर के बाद यह दूसरा ऐसा स्थान है जिससे विश्व विरासत स्थल का दर्ज़ा प्राप्त हुआ है। नालंदा पटना से 98 किमी की दुरी पर स्थित है और यह स्थल अब एक खंडहर में बदल चुका है।

27 में से सिर्फ चार स्थलों को ही इस सूची में शामिल किया गया, जिसमें चीन का जुईआंग हुआशान पाषाण कला सांस्कृतिक परिदृश्य, ईरान का प्राचीन जलसेतु जिसे कनात के नाम से जाना जाता है और भारत से पुरातत्विक स्थल नालंदा महावीर है। इस सूची की घोषणा शुक्रवार को की गई।

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यूनेस्को ने अपनी वेबसाइट के माध्यम से बताया, “नालंदा भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय है। इसने 800 वर्षों से ज्यादा अवधि के लिए निर्बाध रूप से शिक्षा का संचार किया है। ऐतिहासिक विकास की नज़र से यह स्थल और भी महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि इसने बौद्ध धर्म के विकास और शिक्षा परंपराओं में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।”

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पटना क्षेत्र के पुरात्तव विशेषज्ञ प्रवीण के मिश्रा ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए इसे न सिर्फ बिहार बल्कि सम्पूर्ण भारत के लिए गौरव का विषय बताया।

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