शादीशुदा होने के बावजूद भी इन महिलाओ को माना जाता है कुंवारी, एक बार जरूर पढ़े

अगर हम अपने हिन्दू धर्म की बात करे तो हिन्दू धर्म के अनुसार जब किसी लड़की की एक बार शादी हो जाती है, तो उसे कुंवारी नहीं कहा जाता. जी हां भले ही वो शादी के बाद अपने पति से अलग क्यों न हो जाए, लेकिन फिर भी पति से अलग होने के बाद भी उसे डिवोर्सी कह कर पुकारा जाता है. यानि एक शादी होने के बाद लड़की का कुंवारापन खत्म हो जाता है. मगर फिर भी हमारे पुराणों में ऐसी कई महिलाओ के बारे में बताया गया है, जिनकी शादी होने के बावजूद भी वो कुंवारी मानी जाती है. अब ये महिलाएं कौन सी है, ये तो आपको पूरी खबर पढ़ने के बाद ही पता चलेगा. तो चलिए आपको भी इन महिलाओ के बारे में विस्तार से बताते है.

१. अहिल्या.. इस लिस्ट में सबसे पहला नाम अहिल्या का शामिल है. गौरतलब है कि एक दिन गौतम ऋषि जी सुबह स्नान करने और पूजन करने के लिए घर से बाहर गए थे और उसी दौरान इंद्र देव उनका रूप धारण करके वहां पहुँच गए. बता दे कि इसके बाद इंद्र देव अहिल्या के साथ संबंध भी बना लिए और तब गौतम ऋषि वहां पहुँच गए. जिसके बाद अहिल्या ने अपने पति गौतम ऋषि जी को पूरी बात बताई. मगर अहिल्या तो अपने पति के प्रति पूरी तरह से निष्ठावान थी. यानि उन्होंने तो इंद्र देव को गौतम ऋषि समझ कर ही उनके साथ संबंध स्थापित किए थे. ऐसे में किसी भी तरह से अहिल्या की पवित्रता भंग नहीं हुई और इसी वजह से उन्हें कौमार्य माना गया.

२. मंदोदरी.. इस लिस्ट में दूसरा नाम मंदोदरी का शामिल है. अगर पुराणों की माने तो रावण ने मंदोदरी की सुंदरता देख कर उससे विवाह किया था. मगर रावण की मौत के बाद जब श्रीराम जी ने विभीषण को मंदोदरी को आश्रय देने के लिए कहा तो वो मान गए. बता दे कि मंदोदरी के इसी गुण के कारण उन्हें पवित्र माना गया. हालांकि विभीषण से आश्रय लेने के बाद भी मंदोदरी ने कभी अपनी पवित्रता भंग नहीं होने दी और यही उनकी कौमार्यता का सबसे सबूत है.

३. कुंती.. गौरतलब है कि कुंती और पाण्डु का विवाह स्वंयवर में हुआ था. जब कि पाण्डु को ये श्राप मिला था कि अगर वो किसी भी स्त्री को स्पर्श करेंगे तो उनकी मृत्यु हो जाएगी. ऐसे में पाण्डु को हमेशा इस बात की चिंता सताती थी कि अगर उनकी मृत्यु हो जाएगी तो कुरु वंश खत्म हो जाएगा. ऐसे में कुंती जी ने पाण्डु से संबंध स्थापित किए बिना ही धर्म देव से युधिषिठर, वायुदेव से भीम और इंद्र देव से अर्जुन को अपने पुत्र के रूप में प्राप्त किया. यही वजह है कि पाण्डु से शादी करने के बाद भी कुंती को पवित्र यानि कौमार्य माना गया.

४. द्रौपदी.. अब इस लिस्ट में आखिरी नाम द्रौपदी का शामिल है. वैसे ये तो सभी जानते है कि द्रौपदी के पांच पति थे, लेकिन फिर भी उन्हें कौमार्य होने का वरदान प्राप्त था. इसी वरदान के कारण पांच पांडवो से विवाह करने के बाद भी द्रौपदी का कौमार्यपन हमेशा सुरक्षित रहा.

बरहलाल हम तो यही कहेगे कि हमारे इतिहास की ये सभी महान महिलाएं हमारे लिए किसी मिसाल से कम नहीं है.